एक 'फाउल' ने छीन ली जिंदगी: 10 साल तक बिस्तर पर रहे बॉक्सर प्रिचर्ड कोलोन का निधन.. पिता ने लिखा भावुक संदेश!
खेल की दुनिया में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो अपनी जीत से ज्यादा अपनी संघर्ष की कहानी के लिए याद किए जाते हैं। प्यूर्टो रिको के मशहूर मुक्केबाज प्रिचर्ड कोलोन भी एक ऐसे ही नाम थे। 13 अगस्त 2026 को मुक्केबाजी की दुनिया से एक बेहद दुखद खबर आई - प्रिचर्ड कोलोन अब हमारे बीच नहीं रहे। 33 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। पिछले 10 वर्षों से वे एक ऐसी स्थिति में थे जिसे 'वेजिटेटिव स्टेट' कहा जाता है, यानी वे जीवित तो थे लेकिन न बोल सकते थे और न ही चल सकते थे।
वो मैच जिसने सब कुछ बदल दिया
अक्टूबर 2015 में वर्जीनिया के फेयरफैक्स में प्रिचर्ड कोलोन का मुकाबला टेरेल विलियम्स से था। प्रिचर्ड उस समय केवल 23 साल के थे और उनका करियर अपने चरम पर था। उन्होंने अब तक 16 मैच खेले थे और सभी 16 जीते थे। मैच के दौरान विलियम्स ने बार-बार प्रिचर्ड के सिर के पीछे वाले हिस्से (गर्दन के ऊपरी हिस्से) पर मुक्के मारे। इसे मुक्केबाजी में 'रैबिट पंच' (Rabbit Punch) कहा जाता है, जो पूरी तरह प्रतिबंधित है।
प्रिचर्ड ने रेफरी से इसकी शिकायत भी की, लेकिन खेल जारी रहा। मैच के बाद प्रिचर्ड को चक्कर आने लगे और वे लॉकर रूम में गिर गए। जांच में पता चला कि उनके दिमाग में ब्लीडिंग (Brain Bleed) हो रही थी। इसके बाद वे 221 दिनों तक कोमा में रहे।
पिता का दर्द और आखिरी इच्छा
प्रिचर्ड के पिता, रिचर्ड कोलोन ने फेसबुक पर अपने बेटे के निधन की पुष्टि की। उन्होंने स्पेनिश में लिखा, "मेरे लोगों, मुझे आपको यह बताते हुए दुख हो रहा है कि मेरा बेटा प्रिचर्ड अब इस दुनिया से चला गया है। वह अब एक बेहतर जगह पर है। मैंने उसे छुट्टियां बिताने के लिए उसके पसंदीदा देश प्यूर्टो रिको ले जाने की बहुत कोशिश की, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।"
पिछले 10 सालों से प्रिचर्ड के माता-पिता ने उन्हें एक बच्चे की तरह पाला। वे उनकी हर छोटी-बड़ी जरूरत का ख्याल रखते थे। सोशल मीडिया पर उनके वीडियो अक्सर वायरल होते थे, जिसमें उनकी माँ उन्हें खाना खिलाती या फिजियोथेरेपी कराती नजर आती थीं।
'प्रिचर्ड कोलोन रूल' और सुरक्षा
प्रिचर्ड कोलोन की इस त्रासदी ने मुक्केबाजी के नियमों को बदलने के लिए मजबूर कर दिया। वर्ल्ड बॉक्सिंग काउंसिल (WBC) ने 'रैबिट पंच' के खिलाफ जीरो-टोलरेंस की नीति अपनाई। आज इसे 'प्रिचर्ड कोलोन रूल' के नाम से जाना जाता है।
रेफरी को मैच से पहले ही मुक्केबाजों को चेतावनी देनी होती है।
अगर कोई सिर के पीछे मारता है, तो रेफरी को तुरंत एक्शन लेना होता है।
नियमों का उल्लंघन करने पर खिलाड़ी को डिस्क्वालीफाई (बाहर) तक किया जा सकता है।
प्रिचर्ड की चोट ने यह साबित किया कि सिर का पिछला हिस्सा बहुत नाजुक होता है और वहां लगी एक चोट मौत या स्थायी विकलांगता का कारण बन सकती है।
अधूरी रह गई 50 मिलियन डॉलर की कानूनी लड़ाई
2017 में प्रिचर्ड के माता-पिता ने रिंगसाइड डॉक्टर और प्रमोटरों के खिलाफ 50 मिलियन डॉलर का मुकदमा दायर किया था। उनका आरोप था कि अगर डॉक्टर ने सही समय पर मैच रोक दिया होता और प्रिचर्ड की जांच की होती, तो उनके बेटे की यह हालत नहीं होती। हालांकि, 2016 की एक जांच रिपोर्ट में कहा गया था कि किसी एक व्यक्ति को इस दुखद स्थिति के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
एक योद्धा को विदाई
वर्ल्ड बॉक्सिंग ऑर्गेनाइजेशन (WBO) के अध्यक्ष गुस्तावो ओलिविएरी ने प्रिचर्ड को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनकी सबसे बड़ी लड़ाई उनके परिवार के अटूट प्यार और उनकी खुद की सहनशक्ति का प्रमाण थी। प्रिचर्ड कोलोन ने भले ही अपना आखिरी मैच नहीं जीता, लेकिन वे एक ऐसे योद्धा के रूप में याद किए जाएंगे जिन्होंने 10 साल तक हार नहीं मानी। मुक्केबाजी की दुनिया उन्हें हमेशा एक ऐसे सबक के रूप में याद रखेगी जिसने सुरक्षा को खेल से ऊपर रखा।






