Israel और Lebanon बॉर्डर पर तनाव एक नए और खतरनाक दौर में पहुंच गया है। ईरानी समर्थित समूह Hezbollah अब सिर्फ रॉकेट नहीं, बल्कि बेहद चालाक और सटीक ड्रोन्स का इस्तेमाल कर रहा है, जो Israeli सेना के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन गए हैं। BBC Verify ने हाल ही में दर्जनों वीडियो की जांच के बाद खुलासा किया है कि Hezbollah की ड्रोन तकनीक पहले से कहीं ज़्यादा घातक हो गई है। ये ड्रोन न सिर्फ Israel के एडवांस डिफेंस सिस्टम को चकमा दे रहे हैं, बल्कि सीधे तौर पर सैनिकों को निशाना बना रहे हैं। सच यही है कि युद्ध का तरीका बदल रहा है।
- Hezbollah अब FPV (First-Person View) ड्रोन्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहा है, जिससे हमलों की सटीकता बढ़ गई है।
- इनमें से कई ड्रोन फाइबर-ऑप्टिक केबल से जुड़े होते हैं, जिससे इन्हें इलेक्ट्रॉनिक तरीके से जैम करना लगभग नामुमकिन हो जाता है।
- BBC Verify के विश्लेषण से पता चलता है कि ये ड्रोन अब सिर्फ मिलिट्री ठिकानों को नहीं, बल्कि अकेले घूम रहे सैनिकों को भी निशाना बना रहे हैं।
- ये सस्ते ड्रोन Israel के महंगे 'आयरन डोम' डिफेंस सिस्टम को भी भेदने में कामयाब हो रहे हैं, क्योंकि आयरन डोम को रॉकेट के लिए बनाया गया था, ड्रोन्स के लिए नहीं।
- इस नई रणनीति से Hezbollah कम खर्च में Israel को ज़्यादा नुकसान पहुंचा रहा है, जिससे यह संघर्ष और लंबा खिंच सकता है।
- रिपोर्ट्स में Russian टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल की भी आशंका जताई गई है, जो इस मामले को और भी गंभीर बनाता है।
ड्रोन नहीं, ये हैं Hezbollah के 'उड़ने वाले शिकारी'
अब पुराने ज़माने की लड़ाई नहीं रही। Hezbollah ने अपनी रणनीति में एक बड़ा बदलाव किया है और इसका सबसे बड़ा हथियार हैं FPV (First-Person View) ड्रोन्स। सोचो ज़रा, एक ऑपरेटर सैकड़ों मील दूर बैठकर एक वीडियो गेम की तरह इस ड्रोन को कंट्रोल करता है। उसे ऐसा लगता है मानो वो ड्रोन के कॉकपिट में ही बैठा हो। इससे निशाना लगाना बेहद सटीक हो जाता है। लेकिन असली गेम चेंजर है फाइबर-ऑप्टिक केबल। ये ड्रोन एक पतले तार से जुड़े होते हैं, जिससे सिग्नल जैम करने की Israel की काबिलियत — जो उसकी बड़ी ताकतों में से एक है — पूरी तरह बेकार हो जाती है। ये ड्रोन सस्ते, तेज और बेहद घातक हैं। वो चुपचाप उड़ते हुए आते हैं और सीधे किसी सैनिक, टैंक या निगरानी टावर को निशाना बनाते हैं। यह बड़ी बात है।
Israel का मशहूर 'आयरन डोम' क्यों हो रहा नाकाम?
Israel को अपनी आयरन डोम टेक्नोलॉजी पर बहुत भरोसा था, लेकिन Hezbollah के ड्रोन्स ने इस भरोसे को हिला दिया है। इसकी सीधी सी वजह है। आयरन डोम को बड़े और तेज रफ्तार वाले रॉकेटों को हवा में ही नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। लेकिन ये FPV ड्रोन बहुत छोटे होते हैं, धीमी गति से और काफी नीचे उड़ते हैं, जिससे रडार के लिए इन्हें पकड़ना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। और तो और, लागत का गणित भी Hezbollah के पक्ष में है। एक आयरन डोम इंटरसेप्टर मिसाइल की कीमत लाखों डॉलर होती है, जबकि एक हमलावर ड्रोन कुछ हज़ार डॉलर में तैयार हो जाता है। Hezbollah अब एक साथ दर्जनों ड्रोन भेजकर Israel के डिफेंस सिस्टम को उलझा सकता है — यह एक ऐसी रणनीति है जिसका सामना करना बहुत महंगा और मुश्किल है।
Middle East में तनाव का नया चैप्टर और Iran का हाथ
यह लड़ाई सिर्फ Israel और Hezbollah के बीच की नहीं है। इसके तार सीधे Iran से जुड़ते हैं, जो Hezbollah का सबसे बड़ा समर्थक है। माना जा रहा है कि यह एडवांस ड्रोन तकनीक और ट्रेनिंग Iran से ही आ रही है। Times of India की कुछ रिपोर्ट्स में तो Russian टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल तक का अंदेशा जताया गया है। यह ट्रेंड पूरे Middle East के लिए खतरनाक है, क्योंकि यह दिखाता है कि कैसे नॉन-स्टेट एक्टर्स (जैसे Hezbollah) भी अब एडवांस मिलिट्री तकनीक का इस्तेमाल कर सकते हैं। Iran ने हाल ही में UAE को भी Israel से कथित सैन्य समन्वय को लेकर धमकी दी थी। तो, यह साफ है कि यह संघर्ष अब सिर्फ Lebanon बॉर्डर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र में अस्थिरता का एक नया चैप्टर शुरू कर सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
FPV ड्रोन क्या होते हैं और ये इतने खतरनाक क्यों हैं?
देखिए, FPV ड्रोन का मतलब है First-Person View. इसे उड़ाने वाला पायलट एक खास चश्मे (goggles) से वही देखता है जो ड्रोन का कैमरा देख रहा होता है। इससे उसे लगता है कि वो खुद ड्रोन में बैठा है, जिससे निशाना बहुत सटीक लगता है। ये छोटे, तेज और सस्ते होते हैं, इसलिए इनका मुकाबला करना मुश्किल है।
क्या Israel के पास इन ड्रोन्स का कोई तोड़ नहीं है?
सीधी बात यह है कि Israel को मुश्किल हो रही है। उसका आयरन डोम सिस्टम इन छोटे ड्रोन्स के लिए नहीं बना है। फाइबर-ऑप्टिक केबल की वजह से इन्हें जैम भी नहीं किया जा सकता। हालांकि, Israel अब लेजर-आधारित सिस्टम और नई तकनीकों पर काम कर रहा है, लेकिन फिलहाल यह एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
इस ड्रोन युद्ध का आगे क्या असर हो सकता है?
देखिए, इसका असर बहुत बड़ा होगा। यह 'असिमेट्रिक वॉरफेयर' का एक नया उदाहरण है, जहां एक कमजोर पक्ष भी तकनीक का इस्तेमाल कर एक शक्तिशाली देश को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। इससे संघर्ष के लंबे समय तक चलने और ज़्यादा अप्रत्याशित होने की आशंका है, जो पूरे Middle East की शांति के लिए अच्छा नहीं है।




