भारतीय खाने की थाली चटनी के बिना अधूरी है। यह सिर्फ एक साइड डिश नहीं, बल्कि हमारे स्वाद और संस्कृति का अहम हिस्सा है। इसी स्वाद की विरासत को सहेजने के लिए जानी-मानी फूड राइटर Rushina Munshaw-Ghildiyal एक शानदार किताब लेकर आई हैं, जिसका नाम है 'Chutney'। यह कोई आम रेसिपी बुक नहीं है। सोचिए ज़रा। 500 पन्नों की इस विशाल किताब में भारत के कोने-कोने से 200 से ज़्यादा चटनी की रेसिपी और उनसे जुड़ी दिलचस्प कहानियाँ बताई गई हैं। यह किताब चटनी को थाली के कोने से उठाकर मेन हीरो बना देती है।

मुख्य बातें
  • फूड राइटर Rushina Munshaw-Ghildiyal की नई किताब 'Chutney' भारतीय चटनी पर एक encyclopedia है।
  • इस 500-पेज की किताब में 200 से ज़्यादा चटनी की रेसिपी और उनकी कहानियाँ शामिल हैं।
  • किताब को तैयार करने में 100 से ज़्यादा home cooks, chefs और food writers ने योगदान दिया है।
  • यह किताब चटनी को सिर्फ एक side-dish नहीं, बल्कि खाने का 'hero' मानती है।
  • इसमें बंगाल के 'भर्ता' और 'चोखा' जैसे व्यंजनों को भी चटनी के व्यापक दायरे में रखा गया है।
  • इस हार्डकवर किताब की कीमत लगभग ₹3,500 है, जो इसके गहरे research को दर्शाती है।

चटनी: सिर्फ एक साइड डिश नहीं, बल्कि एक पूरी कहानी

अक्सर हम चटनी को खाने के साथ बस एक मामूली सी चीज़ समझकर खाते हैं। लेकिन Rushina की किताब इस सोच को पूरी तरह बदल देती है। उनका मानना है कि हर चटनी की अपनी एक कहानी होती है, अपनी एक याद होती है। जैसे 'नानी की तिल-टमाटर की चटनी' का स्वाद सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि बचपन की यादें भी ताज़ा कर देता है। यह किताब इसी भावना को पकड़ती है। इसमें चटनी को एक 'हीरो इंग्रेडिएंट' के तौर पर पेश किया गया है, जो किसी भी बोरिंग खाने में जान डाल सकती है। सच तो यही है। यह सिर्फ मसालों का मिश्रण नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चले आ रहे प्यार और परंपरा का प्रतीक है।

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200+ चटनियाँ: पूरे भारत का स्वाद एक जगह

यह किताब अपने आप में एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट है। 500 पन्नों की इस हार्डकवर बुक को तैयार करने के लिए देशभर के 100 से ज़्यादा लोगों ने मदद की है। इनमें आम घरों में खाना बनाने वाले, बड़े-बड़े chefs, restaurant के मालिक और फूड लेखक भी शामिल हैं। और इसी वजह से यह किताब इतनी खास बन जाती है। यह किसी एक व्यक्ति की सोच नहीं, बल्कि पूरे भारत के स्वाद का दस्तावेज़ है। किताब में चटनी की कोई एक पक्की परिभाषा नहीं दी गई है। लेखक का मानना है कि जो कुछ भी पिसा हुआ या मसला हुआ साइड डिश है, वह चटनी हो सकती है। इसी परिभाषा के तहत, बंगाल के मशहूर 'भर्ता' और 'चोखा' को भी इस किताब में जगह मिली है, जो आमतौर पर चटनी नहीं माने जाते। यह एक बड़ी बात है।

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क्यों ज़रूरी थी ऐसी किताब?

भारत में हर घर, हर गली, हर ढाबे पर रोज़ाना चटनी बनती है। यह हमारे खान-पान का एक अभिन्न अंग है। लेकिन इसके बावजूद, इस विषय पर बहुत कम लिखा गया है। Rushina Munshaw-Ghildiyal ने इसी कमी को पूरा करने का काम किया है। उन्होंने सालों की मेहनत से उन रेसिपी और कहानियों को इकट्ठा किया है, जो शायद वक्त के साथ खो जातीं। यह किताब सिर्फ रेसिपी नहीं बताती, बल्कि यह भी बताती है कि किस मौसम में कौन सी चटनी बनती है, उसके पीछे की वजह क्या है और उसे बनाने का पारंपरिक तरीका क्या है। इसकी ₹3,500 की कीमत शायद ज़्यादा लगे, लेकिन यह सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि भारत की पाक-कला का एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड है, एक ऐसा खज़ाना है जिसे आप अपनी किचन में सहेज कर रखना चाहेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

इस किताब 'Chutney' में क्या खास है?

देखिए, यह सिर्फ एक रेसिपी बुक नहीं है। यह 500 पन्नों का एक संग्रह है जिसमें 200 से ज़्यादा चटनी की रेसिपी, उनकी कहानियाँ और क्षेत्रीय विविधताएँ हैं। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह चटनी को साइड डिश से उठाकर खाने का हीरो बनाती है।

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क्या यह किताब सिर्फ रेसिपी के बारे में है?

सीधी बात यह है कि नहीं। रेसिपी तो इसका एक हिस्सा है, लेकिन यह किताब चटनी से जुड़ी यादों, परंपराओं और भारतीय संस्कृति के बारे में भी है। इसमें 100 से ज़्यादा लोगों के अनुभव शामिल हैं, जो इसे बहुत व्यक्तिगत और दिलचस्प बनाते हैं।

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इस किताब को किसने लिखा है और इसकी कीमत क्या है?

इस किताब को जानी-मानी फूड राइटर Rushina Munshaw-Ghildiyal ने लिखा है। यह एक प्रीमियम, हार्डकवर किताब है और market में इसकी कीमत लगभग ₹3,500 है। यह कीमत इसके पीछे किए गए गहरे research और बेहतरीन quality को दर्शाती है।