कभी अमेरिकी वीज़ा भारतीय टेक प्रोफेशनल्स का सबसे बड़ा सपना हुआ करता था। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। Blind नाम के एक सर्वे ने बताया है कि बड़ी संख्या में भारतीय अमेरिका से लौट रहे हैं, पर भारत में उन्हें मनचाही या आसानी से नौकरी नहीं मिल रही। यह सिर्फ़ कोई आंकड़ा नहीं, बल्कि उन हज़ारों परिवारों की कहानी है, जिन्होंने एक बेहतर भविष्य की उम्मीद में सात समंदर पार किए थे, और अब लौटकर एक नए तरह की चुनौती का सामना कर रहे हैं।

मुख्य बातें
  • Blind सर्वे के मुताबिक, बड़ी संख्या में भारतीय टेक प्रोफेशनल्स अमेरिका से भारत लौट रहे हैं।
  • लौटकर आए कई प्रोफेशनल्स को भारत में जॉब ढूंढने में कठिनाई हो रही है।
  • भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) इकोसिस्टम बढ़ रहा है, जिससे नौकरी के मौके बढ़े हैं, पर प्रतिस्पर्धा भी।
  • सर्वे में शामिल कई लोगों ने सवाल उठाया है कि इस बढ़ते इकोसिस्टम से सबसे ज़्यादा फायदा किसे हो रहा है।
  • कई टेक कंपनियों में छंटनी और अमेरिका में वीज़ा नियमों की सख्ती को भी वापसी का कारण माना जा रहा है।

अमेरिका से वापसी का बढ़ता ट्रेंड

एक वक्त था, जब सिलिकॉन वैली और अमेरिका में नौकरी पाना भारतीय टेक प्रोफेशनल्स के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी। लेकिन अब हवा का रुख बदल गया है। Blind के सर्वे, जिसमें 1,276 प्रोफेशनल्स शामिल थे, ने चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं। सर्वे के अनुसार, ज़्यादातर भारतीय प्रोफेशनल्स अब अमेरिका से वापस अपने देश लौट रहे हैं। वे परिवार, संस्कृति और भारत में बन रहे अवसरों की तरफ खिंचे चले आ रहे हैं। मुंबई के अंधेरी में रहने वाले 32 वर्षीय अभिनव शर्मा, जो पांच साल सैन फ्रांसिस्को में एक बड़ी टेक कंपनी में काम करके लौटे हैं, कहते हैं, “मुझे लगा था कि मेरा अनुभव यहां काम आएगा, पर दो महीने हो गए हैं, और अभी तक कुछ पक्का नहीं हुआ है।” यह आंकड़ा उनके लिए सिर्फ़ संख्या नहीं, रोज़ की चुनौती है।

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भारत में बढ़ी प्रतिस्पर्धा, अवसर भी कम

तो क्या भारत लौटने वालों के लिए सब कुछ ठीक है? सर्वे बताता है कि नहीं। भारत में नौकरी के अवसर पहले से कहीं ज़्यादा प्रतिस्पर्धी हो गए हैं। जहां एक तरफ देश का ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) इकोसिस्टम लगातार बढ़ रहा है, जिससे नौकरियां पैदा हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ उम्मीदवारों की बढ़ती संख्या से गलाकाट प्रतियोगिता है। बहुत से लोग यह सवाल भी उठा रहे हैं कि इस बढ़ते इकोसिस्टम से आखिर किसे सबसे ज़्यादा फायदा मिल रहा है – क्या कंपनियों को कम सैलरी पर अनुभवी लोग मिल रहे हैं, या वाकई प्रोफेशनल्स को बेहतर मौके मिल रहे हैं? केंद्रीय श्रम और रोज़गार मंत्रालय की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, 2023-24 में आईटी सेक्टर में भर्ती की दर में 15% की कमी देखी गई है, जबकि कुशल कर्मचारियों की उपलब्धता बढ़ी है।

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वीज़ा की समस्या और ग्लोबल छंटनी का असर

अमेरिका से प्रोफेशनल्स की वापसी के पीछे कई कारण हैं। पहला, H1B वीज़ा नियमों का लगातार सख्त होना। 2023 में अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) ने H1B लॉटरी के नियमों में बदलाव की घोषणा की थी, जिससे वीज़ा मिलना और मुश्किल हो गया है। दूसरा, ग्लोबल टेक कंपनियों में बड़े पैमाने पर छंटनी। गूगल, मेटा और अमेज़ॅन जैसी दिग्गज़ कंपनियों ने पिछले दो सालों में हज़ारों कर्मचारियों को नौकरी से निकाला है, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय प्रोफेशनल्स भी शामिल थे। ऐसे में, भारत उनके लिए एक स्वाभाविक ठिकाना बन गया है। लेकिन भारत में भी छंटनी का असर दिखा है। मार्च 2024 में प्रकाशित Nasscom की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय आईटी कंपनियों में 2023 की तुलना में 2024 की पहली तिमाही में नई भर्तियां 10% तक गिरी हैं। ऐसे में, ‘घर वापसी’ का यह फैसला कई लोगों के लिए उम्मीद और अनिश्चितता, दोनों लेकर आया है।

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