ट्रंप की नई 'मुआवजा नीति': ईरान से मांगा दशकों का हिसाब.. युद्ध के बीच छिड़ी पैसों की जंग, क्या कभी खुलेगा समुद्री रास्ता?

दुनिया की दो बड़ी शक्तियों, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब एक ऐसे मोड़ पर आ गया है जहाँ गोलियों के साथ-साथ 'बिल और मुआवजे' की बातें हो रही हैं। हाल ही में ईरान ने अमेरिका से युद्ध के दौरान हुए नुकसान के लिए वित्तीय मुआवजे (Financial Compensation) की मांग की थी। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मांग को न केवल सिरे से खारिज कर दिया, बल्कि ईरान के सामने एक ऐसी 'कंडीशन' रख दी है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका हर्जाना नहीं देगा, बल्कि ईरान को पिछले 50 सालों का हिसाब चुकता करना होगा।

विवाद की जड़: हर्जाने की मांग

इस युद्ध की शुरुआत से ही ईरान का कहना है कि अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाइयों ने उनके देश की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे को तबाह कर दिया है। ईरान ने शर्त रखी है कि जब तक अमेरिका इस नुकसान की भरपाई नहीं करता और उस पर लगे प्रतिबंध नहीं हटाता, तब तक वह 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को फिर से नहीं खोलेगा। बता दें कि यह समुद्री रास्ता दुनिया भर में तेल की सप्लाई के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

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ट्रंप का 'ट्रुथ सोशल' पर धमाका

राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की इस मांग का मजाक उड़ाते हुए इसे एक "दिलचस्प विचार" बताया। उन्होंने कहा कि अगर हर्जाने की बात होगी, तो वह बहुत लंबी होगी। ट्रंप के अनुसार, ईरान को उन सभी अमेरिकी सैनिकों के परिवारों को मुआवजा देना चाहिए जो पिछले दशकों में ईरान समर्थित हमलों में मारे गए हैं।

ट्रंप ने इन घटनाओं का किया जिक्र:

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  1. USS कोल हमला (2000): ट्रंप ने याद दिलाया कि कैसे इस हमले में 17 अमेरिकी नाविकों की जान गई थी। उन्होंने इसके लिए सीधे तौर पर ईरान की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया।

  2. कासिम सुलेमानी और क्षेत्रीय संघर्ष: ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान के दिवंगत कमांडर सुलेमानी ने मध्य पूर्व में हजारों लोगों की मौत का जाल बुना था। ट्रंप ने कहा कि सीरिया, यमन, लेबनान और गाजा में जो भी विनाश हुआ है, उसका बिल तेहरान को भरना चाहिए।

  3. प्रदर्शनकारियों का दमन: एक चौंकाने वाला दावा करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान की सरकार ने पिछले पांच महीनों में ही 52,000 प्रदर्शनकारियों को मार डाला है। उन्होंने मांग की कि ईरान इन पीड़ितों के परिवारों को मुआवजा दे।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य का संकट

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इस कूटनीतिक खींचतान का सबसे बुरा असर वैश्विक बाजार पर पड़ रहा है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने ऐलान किया है कि जब तक उनकी शर्तें नहीं मानी जातीं, हॉर्मुज का रास्ता बंद रहेगा। यह रास्ता बंद होने का मतलब है दुनिया के 20% तेल की सप्लाई का रुक जाना।

भले ही ट्रंप बार-बार दावा कर रहे हैं कि समुद्री रास्ता खुला है, लेकिन हकीकत में वहां जहाजों की आवाजाही न के बराबर है। तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे आम जनता पर महंगाई की मार पड़ रही है।

शांति की उम्मीदें हुईं धुंधली

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विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की इस नई मांग ने समझौते के रास्तों को लगभग बंद कर दिया है। जहाँ ईरान केवल वर्तमान युद्ध की बात कर रहा है, वहीं ट्रंप पिछले 50 सालों के इतिहास को कुरेद रहे हैं। ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहम्मद बागेर जोल्गाद्र ने साफ कहा है कि जब तक अमेरिका अपनी 'आक्रामकता' बंद नहीं करता, यह क्षेत्र 'युद्ध का मैदान' बना रहेगा।

निष्कर्ष

वर्तमान स्थिति दिखाती है कि न तो अमेरिका पीछे हटने को तैयार है और न ही ईरान। ट्रंप ने "बड़े बमबारी अभियान" की धमकी भी दी है, जिससे तनाव और गहरा गया है। यदि यह गतिरोध जल्द समाप्त नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में और बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए किसी आपदा से कम नहीं होगा। पूरी दुनिया अब इस 'चेस गेम' के अगले कदम का इंतजार कर रही है।