स्लोवेनिया में भारत विरोधी साजिश: दूतावास की दीवारों पर लिखे नफरती नारे.. विदेश मंत्रालय ने लिया कड़ा एक्शन, अब क्या होगा?
दुनिया के अलग-अलग देशों में भारतीय दूतावासों (Embassies) को निशाना बनाने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला यूरोपीय देश स्लोवेनिया से सामने आया है। यहाँ की राजधानी लजुब्लियाना (Ljubljana) में स्थित भारतीय दूतावास परिसर के बाहर कुछ भारत विरोधी तत्वों ने तोड़फोड़ की और दीवारों पर नफरत भरे नारे लिखे। बताया जा रहा है कि इस घटना के पीछे खालिस्तानी समर्थकों का हाथ है। भारत सरकार ने इस पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है और स्लोवेनिया सरकार से जवाब मांगा है।
क्या हुई घटना?
10 अगस्त को सामने आई जानकारी के मुताबिक, भारतीय दूतावास की बाहरी दीवारों पर स्प्रे पेंट के जरिए खालिस्तान के समर्थन में नारे लिखे गए थे। इन नारों में भारतीय प्रधानमंत्री को भी निशाना बनाया गया था। यह पहली बार नहीं है जब किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत विरोधी ताकतों ने इस तरह की नीच हरकत की हो। दूतावास जैसे सुरक्षित क्षेत्र में इस तरह की घटना होना सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करती है।
भारत सरकार ने क्या कहा?
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस घटना की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "हम स्लोवेनिया के लजुब्लियाना में अपने दूतावास परिसर को भारत विरोधी तत्वों द्वारा खराब किए जाने की घटना की कड़ी निंदा करते हैं।" भारत ने साफ कर दिया है कि वह इस तरह के अपमान को बर्दाश्त नहीं करेगा।
भारत ने इस मुद्दे को स्लोवेनियाई अधिकारियों के सामने प्रमुखता से उठाया है। नई दिल्ली में स्लोवेनिया के राजदूत और लजुब्लियाना में वहाँ के स्थानीय प्रशासन से बात की गई है। भारत की मांग है कि इस घटना के पीछे जो भी लोग हैं, उन्हें जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
वियना कन्वेंशन का महत्व
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में 'वियना कन्वेंशन' (Vienna Convention) का जिक्र किया है। अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक, किसी भी देश के दूतावास परिसर को सुरक्षा प्रदान करना उस देश की जिम्मेदारी होती है जहाँ वह स्थित है। दूतावास को 'इनवॉयलेबल' (अलंघनीय) माना जाता है, यानी कोई भी बाहरी व्यक्ति वहाँ नुकसान नहीं पहुँचा सकता। भारत ने स्लोवेनिया को याद दिलाया है कि दूतावासों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अनिवार्य है और इसमें कोई ढिलाई नहीं बरती जानी चाहिए।
खालिस्तानी कनेक्शन और दुष्प्रचार
सूत्रों के मुताबिक, इस घटना में शामिल लोग खालिस्तानी समर्थक समूहों से जुड़े हो सकते हैं। हाल के वर्षों में कनाडा, अमेरिका और ब्रिटेन में भी इसी तरह की घटनाएं देखी गई हैं। भारत ने दुनिया भर की कानून प्रवर्तन एजेंसियों से अपील की है कि वे इन समूहों द्वारा फैलाए जा रहे नफरत भरे दुष्प्रचार और गलत सूचनाओं पर ध्यान दें। भारत का कहना है कि यह केवल भारत का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की गरिमा का सवाल है।
भारत और स्लोवेनिया के रिश्ते
दिलचस्प बात यह है कि यह घटना ऐसे समय में हुई है जब भारत और स्लोवेनिया के बीच रिश्ते काफी मजबूत हो रहे हैं। पिछले ही महीने भारतीय राजदूत अमित नारंग ने स्लोवेनियाई विदेश मंत्री के साथ व्यापार और कूटनीति पर चर्चा की थी। जून में स्लोवेनिया के नेशनल डे कार्यक्रम में भी भारतीय अधिकारियों ने हिस्सा लिया था। ऐसे में इस घटना को द्विपक्षीय संबंधों में दरार डालने की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
अन्य देशों में भी हुईं ऐसी घटनाएं
इससे पहले कनाडा में भारतीय राजनयिकों को डराने-धमकाने के पोस्टर लगाए गए थे। ब्रिटेन के लंदन में भारतीय उच्चायोग से तिरंगा हटाने की कोशिश की गई थी। अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में भारतीय वाणिज्य दूतावास में आगजनी की कोशिश हुई थी। भारत सरकार ने हर बार इन घटनाओं पर सख्त विरोध दर्ज कराया है। भारत अब इन मुद्दों पर "जीरो टॉलरेंस" की नीति अपना रहा है।
निष्कर्ष
विदेशों में भारतीय संपत्तियों और नागरिकों की सुरक्षा भारत के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है। स्लोवेनिया में हुई यह घटना दिखाती है कि भारत विरोधी तत्व अब छोटे यूरोपीय देशों में भी सक्रिय हो रहे हैं। भारत ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि अपराधियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। अब गेंद स्लोवेनिया की सरकार के पाले में है कि वह अपने देश में मौजूद इन उपद्रवियों के खिलाफ क्या कदम उठाती है। भारतीय समुदाय भी इस घटना से काफी गुस्से में है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है।




