क्या ट्रंप ईरान से हार मान रहे हैं? परमाणु समझौते की जिद छोड़ अब केवल समुद्री रास्ता खुलवाने पर जोर, जानें पर्दे के पीछे की कहानी!
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ चल रहे युद्ध को लेकर अपनी रणनीति में एक बड़ा बदलाव कर सकते हैं। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप अब ईरान के साथ एक नए परमाणु समझौते की अपनी जिद को छोड़ सकते हैं। इसके बदले में वे केवल यह चाहते हैं कि ईरान दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz), को पूरी तरह से फिर से खोल दे।
यह युद्ध इसी साल फरवरी में शुरू हुआ था। उस समय ट्रंप का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना था। लेकिन अब महीनों की लड़ाई के बाद, अमेरिकी प्रशासन को लग रहा है कि परमाणु समझौते से ज्यादा जरूरी समुद्री व्यापार को बहाल करना है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व और संकट
हॉर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच एक बहुत ही संकरा समुद्री रास्ता है। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने अपनी मिसाइलों और ड्रोन के जरिए इस रास्ते को बंद कर दिया है।
इस रास्ते के बंद होने से पूरी दुनिया में तेल की सप्लाई रुक गई है। इसका सीधा असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ा है। अमेरिका में भी तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ट्रंप के लिए यह एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गई है क्योंकि अमेरिका में तीन महीने से भी कम समय में चुनाव होने वाले हैं।
ईरान की कड़ी शर्तें
ईरान इस मौके का फायदा उठा रहा है और उसने रास्ता खोलने के लिए अमेरिका के सामने शर्तों की एक लंबी लिस्ट रख दी है। ईरान की मांगें कुछ इस प्रकार हैं:
अमेरिका उस पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध हटा दे।
अमेरिका की जब्त की गई ईरानी संपत्ति को वापस किया जाए।
ईरान को अरबों डॉलर का हर्जाना दिया जाए।
अमेरिकी सेना उस क्षेत्र से पूरी तरह बाहर निकल जाए।
समुद्री मार्ग से अमेरिकी नौसेना की घेराबंदी खत्म हो।
इन शर्तों ने वाशिंगटन के लिए कूटनीतिक रास्ते कम कर दिए हैं। ईरान यह संकेत दे रहा है कि वह जल्द समझौते के मूड में नहीं है और एक लंबी लड़ाई के लिए तैयार है।
ट्रंप पर चुनावों का दबाव
ट्रंप ने पिछले कुछ हफ्तों में कई बार यह दावा किया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य पहले ही खुल चुका है, लेकिन उनके ये दावे सच नहीं निकले। जमीन पर हकीकत यह है कि तेल की सप्लाई अभी भी बाधित है।
अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनावों (Midterm Elections) को देखते हुए ट्रंप पर भारी दबाव है। अमेरिकी मतदाता महंगाई और तेल की बढ़ती कीमतों से परेशान हैं। ट्रंप को डर है कि अगर तेल की कीमतें कम नहीं हुईं, तो उनकी पार्टी को चुनाव में भारी नुकसान हो सकता है। इसीलिए वे अब परमाणु समझौते की शर्त को दरकिनार कर केवल समुद्री रास्ते को प्राथमिकता दे रहे हैं।
निष्कर्ष
ट्रंप का यह संभावित फैसला दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कभी-कभी आर्थिक जरूरतें सैन्य उद्देश्यों पर भारी पड़ जाती हैं। ट्रंप ने युद्ध तो परमाणु मुद्दे पर शुरू किया था, लेकिन अब वे तेल की कीमतों को काबू में करने के लिए समझौता करने को तैयार दिख रहे हैं। अगर यह समुद्री रास्ता खुलता है, तो वैश्विक बाजारों को राहत मिलेगी, लेकिन परमाणु मुद्दा अभी भी अनसुलझा ही रहेगा। आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ईरान ट्रंप के इस लचीले रुख पर क्या प्रतिक्रिया देता है।




