अब युद्ध नहीं, सिर्फ आर्थिक चोट! ईरान पर ट्रंप का नया पैंतरा.. क्या 'शतरंज की बिसात' पर मात खाएगा तेहरान?
अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से चल रहे खूनी संघर्ष में अब एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वे अब ईरान पर नए सैन्य हमले करने के पक्ष में नहीं हैं। इसकी जगह वे ईरान को आर्थिक रूप से पंगु बनाने की नीति पर काम कर रहे हैं। ट्रंप का मानना है कि बमबारी से ज्यादा असरदार आर्थिक प्रतिबंध और समुद्री घेराबंदी (Naval Blockade) साबित हो रही है।
रविवार को एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, "हम इसे अब बहुत लो-की (Low-key) तरीके से ले रहे हैं।" उन्होंने बताया कि वाशिंगटन फिलहाल तेहरान के साथ "केवल अर्ध-वार्ता" (Semi-negotiating) कर रहा है और यह देख रहा है कि युद्ध का ईरान की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ा है।
ईरान की खस्ता आर्थिक हालत
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान इस समय वित्तीय रूप से "बहुत बुरी स्थिति" में है। वहां महंगाई चरम पर है और सरकार के पास अपने सैनिकों को वेतन देने के लिए भी पैसे नहीं बचे हैं। ट्रंप ने अप्रैल से लागू अमेरिकी नौसैनिक घेराबंदी को इसका श्रेय दिया। इस घेराबंदी की वजह से ईरान का व्यापार पूरी तरह ठप हो गया है। ट्रंप ने स्थिति को शतरंज के खेल से जोड़ते हुए कहा, "सब कुछ ठीक हो जाएगा। यह शतरंज के खेल जैसा है और हम सही चालें चल रहे हैं।"
तेल की कीमतों ने बदली हवा
इस युद्ध की शुरुआत में पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगी थीं, जिससे ट्रंप सरकार को अपने ही देश में आलोचना का सामना करना पड़ा था। लेकिन अब राष्ट्रपति के लिए अच्छी खबर यह है कि तेल की कीमतें गिरकर 75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर हो गई हैं। तेल की कीमतों में इस गिरावट ने अमेरिकी उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ कम कर दिया है। ट्रंप को लगता है कि अब उन्हें जल्दबाजी में कोई बड़ा सैन्य हमला करने की जरूरत नहीं है क्योंकि तेल का संकट कम हो गया है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर समाधान की उम्मीद?
पर्दे के पीछे ओमान की मध्यस्थता में हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए बातचीत चल रही है। ईरान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि ये बातचीत अब अपने "अंतिम" चरण में है। दोनों पक्ष एक नए शिपिंग रूट के कोऑर्डिनेट्स पर सहमत होने के करीब हैं। हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह तब तक रास्ता पूरी तरह नहीं खोलेगा जब तक अमेरिका अपना "व्यवहार" नहीं सुधारता। ईरान की मांगों में समुद्री घेराबंदी हटाना, सैन्य कार्रवाई बंद करना और युद्ध के नुकसान की भरपाई करना शामिल है।
टूटा हुआ संघर्षविराम और क्षेत्रीय तनाव
जून में हुआ संघर्षविराम कुछ ही हफ्तों में टूट गया था, जिसके बाद लड़ाई फिर से शुरू हो गई। ईरान समर्थित गुट कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हमले कर रहे हैं। वहीं यमन के हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ अपनी अलग समुद्री घेराबंदी शुरू कर दी है। इन सबके बीच ट्रंप का 'सॉफ्ट' रुख अपनाना एक रणनीतिक चाल मानी जा रही है।
क्या इजराइल से हैं मतभेद?
रिपोर्ट्स बताती हैं कि वाशिंगटन और इजराइल के बीच कुछ खींचतान चल रही है। इजराइल चाहता है कि अमेरिका गाजा और लेबनान में भी लड़ाई को जल्दी खत्म करने के लिए और अधिक प्रयास करे। लेकिन ट्रंप फिलहाल ईरान को आर्थिक रूप से कमजोर करने पर ही अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ट्रंप की यह 'आर्थिक रणनीति' ईरान को मेज पर लाने में सफल होती है या क्षेत्रीय तनाव और गहराता है।




